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साहित्य विकास नहीं राष्ट्र चेतना के लिए

Posted On: 29 Nov, 2013 Others,social issues,कविता,(1),100 में

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हम साहित्य विकास नहीं राष्ट्र चेतना के लिए बढ़े हैं……जो यह सोचता है की राष्ट्र के लिए कहने को उसके पास कुछ शब्द हैं वो अवस्य यहाँ आए और अपने विचारों को लिखे…………www.bharatmitramanch.com

BMM

विचार को गढ़ें अभी अगर हो दिल में भारती……..

चलो बढ़ें, चलो बढ़ें, है मात्रभूमि पुकारती……….

…….

विचार के धनी यहाँ कई वतन के लाल हैं……..

लिखना यहाँ पड़ेगा क्योंकि राष्ट्र का सवाल है……

…….

राष्ट्र के विकार को मन में जरा विचारलो…….

चित्र राष्ट्र की जरा खुली आँख से निहार लो…….

…….

क्यों अवनति की ओर अपना राष्ट्र देखो चल पड़ा……

विशुद्ध भाव है मगर ये क्यों अंधेरों में पड़ा…….

……..

उजियारों को खोजने नहीं कोई भी आएगा……..

आदर्श के भले कई फतवे सुनाता जाएगा…….

……..

कहते रहें जो कह रहें कई जगह पे अनकही……

हम राष्ट्र के फ़क़ीर हैं उम्मीद बस बुझे नहीं…….

……..

बस प्रेम बांटते रहें और दिल में भावना बहे…….

चाहे अंजाम जो रहे ये जोश बस बना रहे…………

भारत मित्र मंच

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
December 6, 2013

कहते रहें जो कह रहें कई जगह पे अनकही…… हम राष्ट्र के फ़क़ीर हैं उम्मीद बस बुझे नहीं……. …….. बस प्रेम बांटते रहें और दिल में भावना बहे……. चाहे अंजाम जो रहे ये जोश बस बना रहे… प्रिय आनंद जी ये जोश दुगुना बढ़ता रहे ..पग बढ़ते रहें …हाथ से हाथ और मन से मिले मन …कामयाबी आएगी ही …सुन्दर भ्रमर ५

sinsera के द्वारा
December 4, 2013

आवाहन करती सुन्दर रचना और अख़बार में छपने कि बधाई..

December 3, 2013

उजियारों को खोजने नहीं कोई भी आएगा…….. आदर्श के भले कई फतवे सुनाता जाएगा……. ……सुन्दर अति सुन्दर मित्र! ……………..आधे-अधूरे सच को व्यक्त करती हुई पक्तियां……………अधिकांशतः लोग स्वार्थ, सत्ता और वर्चस्व के लिए इतना पागल हो गए हैं कि खुद को एक अँधेरी कोठरी में बंद कर लिए हैं और बस उसी को सत्य मान बैठे. प्रकश की लाख किरण दिखने के बावजूद भी वह उस अँधेरे से निकलना नहीं चाहते………………वैसे अच्छी कोशिश है अँधेरे में बैठकर दीपक की बात करने की…………………..शुभकामनाएं…………..

jlsingh के द्वारा
December 1, 2013

बस प्रेम बांटते रहें और दिल में भावना बहे……. चाहे अंजाम जो रहे ये जोश बस बना रहे………… भारत मित्र मंच सादर प्रिय आनन्द जी!

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 1, 2013

    बस आपका आशीर्वाद है सर…………जय हिन्द………जय भारत


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