राजनीति

नयी सोच नयी क्रांति

40 Posts

1427 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8082 postid : 433

"देश की यही पुकार है"

  • SocialTwist Tell-a-Friend

“सत्कर्मों के लिए सम्मान, दुर्गुणों के लिए है दंड विधान,
संरक्षण देकर दुष्टों को, देश का हो रहा अपमान”

वाद – विवाद है चला हुआ, “अफजल” कब फाँसी पाएगा,

सजा मिलेगी उसको या, वो यूँही जीता जाएगा,

जेल में वो मेहमान बना, ये देख – देख मुस्काता है,

हाय अभागी “नीति” अपनी, इनका कुछ ना कर पाता है,
चुभता है ये सिने में, क्यों लोग हुए लाचार है,
चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है”

राजनीति में पिसा हुआ, ये कैसा मुद्दा बना हुआ,
शर्म करो नेताओं अब, माहोल है कैसा तना हुआ,
इच्छाशक्ति होती तुममें, तो दिख जाती इक बार भी,
नहीं “शहीदों” की बेवा, रोती रहती हर बार ही,
वो पुण्य “शहीदों” के मजार भी, बोल रहे “धिक्कार” है,
चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है”
कहाँ से होगी चिंता उनको, जो देश को खा के बैठे हैं,
अपनो में ऐसे उलझें की, मुद्दों से भागे बैठे हैं,
इनका जबाब भी टका हुआ, इनके जैसा ही होता है,
करनी चाहे हो न हो, कथनी में सब कुछ होता है,
जाके इनसे कोई पूछो, क्या सुख चुका ही “विचार” है,
चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है”
इसी लिए हम देश के अन्दर, भी हैं देखो बँटे हुए,
इन्ही के कारण अपनो से भी, देखो हम है कटे हुए,
छोटे – छोटे मुद्दो पे सब, बस यूँही लड़ते रहते हैं,
और बड़े – बड़े बातों पे, हम चुप्पी साधे रहते हैं,
सोच हमारी बँटी हुई है, इसी लिए तो विकार है,
चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है”
“न्याय करो” अन्याय रूप में, देखो यह है बदल रहा,
देर हुई है इतनी अब, विश्वास हमारा मचल रहा,
नहीं अगर ये पूर्ण न्याय, आज अगर दे पाओगे,
आने वाले कल को कैसे, अपना मुँह दिखलाओगे,
आधी न्याय से हम लोगों का, साफ़ – साफ़ इनकार है,
चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है”
ANAND PRAVIN
देश की सरकार से तेरह तारिक से पहले मेरा यह आवाहन………..उन्हें सुनना ही होगा

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (17 votes, average: 4.76 out of 5)
Loading ... Loading ...

52 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 19, 2012

पुनश्च……… बेस्ट ब्लौगर बनने पर हार्दिक बधाई !

yamunapathak के द्वारा
December 19, 2012

आनंद जी बेस्ट ब्लॉगर के रूप में चयनित होने की हार्दिक बधाई.

sanjay singh के द्वारा
December 19, 2012

प्रिय आनंद जी सिर्फ इतना कहूँगा “अदभुत” “अदभुत” “अदभुत” “अदभुत” “अदभुत” ………………………………… मेरा हार्दिक अभिनन्दन स्वीकार करे, और लिखते रहे . आपका संजय सिंह “भारतीय”

seemakanwal के द्वारा
December 17, 2012

आनंद जी देश की आवाज़ की अनसुनी नही हो पायेगी एक को फांसी दी गयी इसका नम्बर भी जल्द आएगा .

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 17, 2012

.बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको .

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
December 16, 2012

इसी लिए हम देश के अन्दर, भी हैं देखो बँटे हुए, इन्ही के कारण अपनो से भी, देखो हम है कटे हुए, छोटे – छोटे मुद्दो पे सब, बस यूँही लड़ते रहते हैं, और बड़े – बड़े बातों पे, हम चुप्पी साधे रहते हैं, सोच हमारी बँटी हुई है, इसी लिए तो विकार है, चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है” प्रिय आनंद जी बहुत सुन्दर पुकार और आह्वान आप की हमारी हम सब की ये मांग जल्द ही पूरी हो तो आनंद और आये बुराई को मुंह की खानी पड़े इमान धर्म पनपे तो अच्छा हो …बहुत सुन्दर … बधाई हो बेस्ट ब्लॉगर के लिए …मन खुश हुआ जय श्री राधे भ्रमर ५

minujha के द्वारा
December 15, 2012

आनंद भाई बहुत अच्छी रचना,ढेर सारी बधाई सप्ताह के सम्मान के लिए व इस आह्वान के लिए भी.

sudhajaiswal के द्वारा
December 14, 2012

आनंद जी, उम्दा रचना, बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई|

shailesh001 के द्वारा
December 14, 2012

यह मांग करने के लिए कविता व गीत नहीं रचने थे.. हमें ागाने और बजाने की ही आदत है.. चाहते हैं तो हुंकार भरनी होगी..  

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 14, 2012

प्रिय आनंद जी, सस्नेह खिताब हेतु बधाई.

Sushma Gupta के द्वारा
December 14, 2012

प्रिय आनंद जी,देश की इस पुकार के लिए आपसे पूर्ण सहमति… सुदर प्रस्तुति एवं वेस्ट ब्लोगर ऑफ़ द वीक हेतु आपको बहुत वधाई …

vaidya surenderpal के द्वारा
December 14, 2012

चढ़ा दो उनको फाँसी पर, अब देश की यही पुकार है । लेकिन यह दुभाग्यपूर्ण है कि सरकार में बैठे हुए लोग ही आतँकियोँ के पैरोकार है । बैस्ट ब्लागर बनने की हार्दिक शुभकामनाएं ।

Malik Parveen के द्वारा
December 14, 2012

आनद भाई ब्लोग्गर ऑफ़ दी वीक बन्ने के लिए बहुत बहुत शुभकामनायें !! :) :)

yogi sarswat के द्वारा
December 14, 2012

राजनीति में पिसा हुआ, ये कैसा मुद्दा बना हुआ, शर्म करो नेताओं अब, माहोल है कैसा तना हुआ, इच्छाशक्ति होती तुममें, तो दिख जाती इक बार भी, नहीं “शहीदों” की बेवा, रोती रहती हर बार ही, वो पुण्य “शहीदों” के मजार भी, बोल रहे “धिक्कार” है, चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है” एक आध नेता टपक जाना चाहिए था तभी शायद अफज़ल को फंसी हो पाती ? अब तो हमारा “महामूर्ख ” मंत्री कहता है की उसे मौत की सजा नहीं उम्रकैद दे दो ! मुझे लगता है बेकार में ही कोर्ट वोर्ट का झंझट पाल रखा है भारतीय न्यायव्यवस्था में ! हमारा ये मंत्री ही सब कुछ कर सकता है , सारे फैसले ले सकता है , दे सकता है फिर न्यायधीश क्यूँ बिठा रखे हैं ? इसे साले को अपनी टट्टी धोनी नहीं आती होगी और साला मंत्री बना बैठा है ! आपके शब्दों को सही सम्मान दिया है जागरण ने ! बहुत बहुत बधाई आनंद प्रवीण जी !

Jaynit Kumar के द्वारा
December 14, 2012

Ati sundar rachna.. Congratulation Anand ji.. :)

jlsingh के द्वारा
December 14, 2012

“न्याय करो” अन्याय रूप में, देखो यह है बदल रहा, देर हुई है इतनी अब, विश्वास हमारा मचल रहा, नहीं अगर ये पूर्ण न्याय, आज अगर दे पाओगे, आने वाले कल को कैसे, अपना मुँह दिखलाओगे, आधी न्याय से हम लोगों का, साफ़ – साफ़ इनकार है, चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है” प्रिय आनंद जी, बहुत बहुत बधाई हो! एक ‘न्याय’ जो अभी हुआ, जे जे का हर जन सुखी हुआ! बहुत बधाई! प्रिय आनंद, आनंदित यह परिवार है!

Amresh Bahadur Singh के द्वारा
December 13, 2012

आनंद प्रवीण जी,हार्दिक बधाई……………….

Santosh Kumar के द्वारा
December 13, 2012

शानदार रचना के सुपरस्टार को मूरख का हार्दिक सलाम ,…ढेरों शुभकामनाएं वन्देमातरम

rekhafbd के द्वारा
December 13, 2012

आनंद जी ,बेस्ट ब्लागर आफ द वीक बनने पर आपको हार्दिक बधाई

meenakshi के द्वारा
December 13, 2012

आनंद प्रवीण जी, साप्ताहिक सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर के लिए आपको बहुत-२ बधाई ! नहीं अगर ये पूर्ण न्याय, आज अगर दे पाओगे, आने वाले कल को कैसे, अपना मुँह दिखलाओगे, उपर्युक्त पंक्तियाँ बहुत उचित लगीं . मीनाक्षी श्रीवास्तव

alkargupta1 के द्वारा
December 13, 2012

ब्लॉगर ऑफ़ द वीक का सम्मान प्राप्ति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आनंद प्रवीण जी

omdikshit के द्वारा
December 13, 2012

आनंद जी, बधाई. बहुत सुन्दर भाव.जहाँ तक ….मुंह दिखाने…. की बात है,यह बात इज्ज़तदारों के लिए है,बेशर्मों के लिए नहीं.

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    अब तो उन्हें बेशर्म कहने में भी शर्म आती है सर………..क्या करे उनकी जात ही कुछ ऐसी हो गई है सुन्दर प्रतिक्रया के लिए आभार ॐ सर…….

Santlal Karun के द्वारा
December 13, 2012

आदरणीय आनंद प्रवीण जी, सर्व प्रथम बेस्ट “ब्लॉगर ऑफ़ द वीक’ के लिए बधाई ! फिर शासकीय विडम्बना पर आधारित जनाक्रोश और जनतंत्र की उत्तेजना का धैर्य खोता स्वराघाती गीत के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! ““न्याय करो” अन्याय रूप में, देखो यह है बदल रहा, देर हुई है इतनी अब, विश्वास हमारा मचल रहा, नहीं अगर ये पूर्ण न्याय, आज अगर दे पाओगे, आने वाले कल को कैसे, अपना मुँह दिखलाओगे, आधी न्याय से हम लोगों का, साफ़ – साफ़ इनकार है, चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है””

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय संतलाल सर, सादर प्रणाम आपका आभार सर……… वास्तव में यह शासकीय विडंबना ही है नहीं तो देश की ऐसी दुर्गति ना होती आशीर्वाद हेतु पुनः आभार …….

vikramjitsingh के द्वारा
December 13, 2012

बहुत दिनों बाद वीर-रस से परिपूर्ण एक उत्कृष्ट रचना पढने को मिली…..आनंद जी…. बहुत बढ़िया लगा……. काश..!!! ये ‘पुकार’ लोकसभा में बैठे हुए ‘नामर्दों’ तक भी पहुँच पाती…/// हार्दिक शुभकामनायें……

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय विक्रम भाई, सादर प्रणाम काफी दिनों बाद प्रतिक्रया देख दिल खुश हुआ …….. आपके वचन को मेरा भी समर्थन………..लोकसभा के साथ राज्यसभा को भी जोड़ लेते हैं……

sinsera के द्वारा
December 13, 2012

बहुत भावभरी रचना आनंद ji, बेस्ट ब्लॉगर बनने की बहुत बहुत बहुत बधाई….. वीर रस की कविता लिखने में तो आपको कमाल हासिल है, बस एक बात मुझे खटकती है …..कसाबों और अफज़लों को फाँसी दे कर क्या हम आतंकवाद से छुटकारा पा लेंगे……???

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय सरिता दीदी, सादर प्रणाम सबसे पहले तो बधाई के लिए आभार…….फिर आपके पदचिन्हों पर कुछ बढ़ा ख़ुशी हुई वीर रश ही नहीं मुझे और भी कविता कहनी आती है……कुछ तो आपसे ही सिखा है बस शिल्प से अनजान हूँ आप सहयोग देंगी तो अवश्य सिख जाऊँगा कसाब या अफजल या कोई और फांसी व्यक्ति नहीं अभिवक्ति को दी जानी चाहिए और त्वरित दी जानी चाहिए ताकि अपनों के बिच एक असंतोष ना फैले अतएव इतनी देर से फांसी दे भी दी तो कोई फायदा नहीं …….दूसरी बात यह भी है की दंडविधान तो दंडविधान ही है फिर चाहे किसी के लिए भी हो……….फांसी तो उन्हें भी देनी चाहिए जो देश के अन्दर के दरिन्दे हैं जैसे बलात्कारी और समाजिक हत्यारे जो भी हो आपकी लेख का इन्तजार है……..इसबार महिलाओं के लिए कुछ लाइए बड़ी विकट स्थिति में है वो

Tamanna के द्वारा
December 13, 2012

आनंद जी… बहुत सुंदर रचना.. आपकी कविताएं वैसे भी बहुत उत्कृष्ट होती हैं. बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने के लिए बहुत-बहुत बधाई.

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आपका ह्रदय से आभार आदरणीय तमन्ना जी…………..काफी दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया पा हर्ष हुआ

akraktale के द्वारा
December 12, 2012

न्याय करो” अन्याय रूप में, देखो यह है बदल रहा, देर हुई है इतनी अब, विश्वास हमारा मचल रहा, नहीं अगर ये पूर्ण न्याय, आज अगर दे पाओगे, आने वाले कल को कैसे, अपना मुँह दिखलाओगे, सुन्दर ओज पूर्ण रचना. प्रक्रिया में जो तेजी देखने को मिल रही है उससे लगता है अब बहुत देर नहीं है. देशभक्ति की भावना जगाती सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें प्रिय आनंद जी. 

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय अशोक सर, सादर प्रणाम सही कहा आपने सर उम्मीद तो बंधी है ……….किन्तु अफजल और कसाब में अंतर भी है एक तो यह देश का है और कसाब पाकिस्तानी……ऊपर से यह मास्टर माइंड है और कसाब चली हुई गोली और सबसे बड़ी बात सर………….”मच्छर’ वाला ट्विस्ट अब सिर्फ दुआ ही की जा सकती है …….सुन्दर प्रतिक्रया के लिए आभार सर

rekhafbd के द्वारा
December 11, 2012

आनंद जी इसी लिए हम देश के अन्दर, भी हैं देखो बँटे हुए, इन्ही के कारण अपनो से भी, देखो हम है कटे हुए, छोटे – छोटे मुद्दो पे सब, बस यूँही लड़ते रहते हैं, और बड़े – बड़े बातों पे, हम चुप्पी साधे रहते हैं, सोच हमारी बँटी हुई है, इसी लिए तो विकार है, चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है”बढ़िया अभिव्यक्ति …

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आपका आभार आदरणीय रेखा मैम…………

alkargupta1 के द्वारा
December 11, 2012

आनंद प्रवीण जी , श्रेष्ठ काव्यात्मक अभिव्यक्ति …सरकार के कानों पर जूँ भी नहीं रेंगती……. आपकी और देश की यह पुकार शीघ्र ही सरकार सुनेगी

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    उम्मीद तो यही है मैम…………देखिये क्या होता है सुन्दर प्रतिक्रया के लिए आभार……

krishnashri के द्वारा
December 10, 2012

प्रिय आन्नद जी , सादर ,सुन्दर भाव ,सुन्दर शब्द ,सुन्दर विचार ,सुन्दर छंद , बधाई .

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आपका आभार सर………….

Malik Parveen के द्वारा
December 10, 2012

जन जन की है यही पुकार पर सुनती कहा है ये सरकार…. बहुत सुंदर आनंद भाई … बधाई

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आपका धन्यवाद दीदी………..

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 9, 2012

लूटेरे – लुच्चों को अपने नहीं वतन से प्यार है ! इनको तो बस केवल अपनी कुर्सी से दरकार है !!… मान्य भाई प्रवीण जी, सार्थक पहल के लिए हार्दिक बधाई !

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय विजय सर, सादर प्रणाम आपके आशीर्वाद को पा ह्रदय प्रफुल्लित हुआ……………और सुन्दर प्रतिक्रया के लिए आभार

Santosh Kumar के द्वारा
December 9, 2012

प्रिय आनंद भाई ,..सादर अभिवादन कविश्रेष्ठ की कमी खल रही, शिष्य रहा ललकार है! चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है”………बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक अभिनन्दन ,..वो तभी सुनेंगे जब कोई फायदा होगा और यहाँ तो वोट बैंक खिसकेगा भाई ,..तेरह जनवरी से पहले क्या ये बत्तीस जनवरी तक नहीं सुनने वाले हैं ,….शेष मूरख क्या कहे ,… विकार मिटाना होगा भाई ,..आप जैसे जोशीले युवाओं के होते हुए आशा बलवती है ,..देश जागकर एकजुट होगा !….हमारा विश्वास न मचले !…यही तो धैर्य की परीक्षा है ,…पीड़ा तपाकर मजबूत बनाती है ,…. ..भगवान का न्याय कभी आधा नहीं होगा ,..वो हमारे साथ पूर्ण न्याय करेंगे ,.इन देशद्रोहियों से न्याय की बात कहना न्याय का अपमान है … बहुत सुन्दर रचना के लिए हार्दिक अभिनन्दन वन्देमातरम

    Santosh Kumar के द्वारा
    December 11, 2012

    कृपया जनवरी की जगह दिसंबर पढ़ें !

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय संतोष भाई, सादर प्रणाम यही तो बात है भाई सरकार कहाँ से जागेगी …………सरकार तो बस राजनीति ही करनी जानती है और एक दिन इसी राजनीति में डूब मरेगी सुन्दर प्रतिक्रया के लिए आभार

jlsingh के द्वारा
December 9, 2012

प्रिय आनंद जी, सादर! कविश्रेष्ठ की कमी खल रही, शिष्य रहा ललकार है! चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है” बहुत सुन्दर ! प्रणव दा तक यह बात पहुंचानी चाहिए! उन्होंने एक सही फैसला लिया – कसाब को फंसी दिलवाकर!

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय जवाहर सर, सादर प्रणाम कविश्रेष्ठ की कमी खल रही, शिष्य रहा ललकार है! चढ़ा दो उनको फाँसी अब की “देश की यही पुकार है”……………..अब आपके ही आवाहन की आवश्यकता है सर प्रणव दा को तो सुखद जगह मिल ही गया है अब वो राजशाही संभालें की मुद्दों को पर उनसे उम्मीद तो है……..देखिये क्या होता है

nishamittal के द्वारा
December 8, 2012

आपकी नहीं जन जन की पुकार है,परन्तु नेताओं को अपनी राजनीति चमकाने की दरकार है.

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय निशा मैम, सादर प्रणाम नेता तो जात ही राजनीति चमकाने वाली है……………..सुन्दर प्रतिक्रया के लिए आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 8, 2012

देश की यही पुकार है ..सहमत. बहुत खूब, बधाई. स्नेही सादर

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    December 19, 2012

    आदरणीय प्रदीप सर, सादर प्रणाम आपकी सहमती में ही आशीर्वाद छुपा है…………


topic of the week



latest from jagran